छतरपुर। नगरपालिका द्वारा शहर में दी जा रही पेयजल सुविधा और उससे जुड़े राजस्व संग्रहण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि शहर में हजारों उपभोक्ताओं से पानी का शुल्क तो वसूला जा रहा है, लेकिन वर्षों से उन्हें विधिवत बिल उपलब्ध नहीं कराया गया है। वहीं, इस मामले में नगरपालिका अधिकारियों के अलग-अलग बयान भी व्यवस्था की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार नगरपालिका क्षेत्र में करीब 30 हजार नल कनेक्शन हैं, जिनमें 9 हजार पुराने और लगभग 21 हजार नए कनेक्शन अमृत योजना के तहत दिए गए हैं। निर्धारित दर के अनुसार प्रत्येक उपभोक्ता से 160 रुपये प्रतिमाह जल शुल्क लिया जाता है। इस आधार पर नगरपालिका को हर महीने लगभग 48 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त होना चाहिए।
शहरवासियों का आरोप है कि कई वर्षों से पानी का नियमित बिल जारी नहीं किया गया। उपभोक्ताओं का कहना है कि बिना किसी पूर्व सूचना के शुल्क की वसूली की जाती है और कई बार समय पर रसीद भी उपलब्ध नहीं कराई जाती। ऐसे में उपभोक्ताओं को यह जानकारी नहीं मिल पाती कि उनसे किस आधार पर कितनी राशि ली जा रही है।
मामले में अधिकारियों के बयान भी एक-दूसरे से मेल नहीं खाते। पेयजल व्यवस्था के प्रभारी सब इंजीनियर गोकुल प्रसाद प्रजापति का कहना है कि उपभोक्ताओं को भुगतान संबंधी जानकारी मैसेज के माध्यम से भेजी जाती है। वहीं मुख्य नगरपालिका अधिकारी माधुरी शर्मा का दावा है कि जिन उपभोक्ताओं के मोबाइल नंबर उपलब्ध हैं, उन्हें हर माह बिल भेजा जाता है।
हालांकि शहरवासियों का कहना है कि उन्हें आज तक नियमित रूप से पानी का बिल प्राप्त नहीं हुआ है। इसके चलते बिना बिल की वसूली और राजस्व प्रबंधन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने मांग की है कि मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार प्रत्येक उपभोक्ता को नियमित मासिक बिल उपलब्ध कराया जाए तथा अब तक हुई वसूली का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए, ताकि राजस्व संग्रहण और खर्च की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बन सके।
अब निगाहें नगरपालिका प्रशासन पर हैं कि वह इन आरोपों और अनियमितताओं के संबंध में क्या कदम उठाता है।
