गरीब मरीजों की जेब पर वार, इलाज पर सवाल-जिला अस्पताल फिर कटघरे में
गरीबों का अस्पताल या सवालों का अड्डा? ऑपरेशन विवाद से मचा बवाल
जिला अस्पताल, जिसे गरीब और जरूरतमंद मरीजों के इलाज का सबसे बड़ा सहारा माना जाता है, आज खुद सवालों के घेरे में है। एक बुजुर्ग मरीज के ऑपरेशन को लेकर सामने आए विवाद ने अस्पताल की व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाब-देही पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिए हैं।
मरीज के परिजनों का आरोप है कि प्रोस्टेट ऑपरेशन के नाम पर 12 हजार लिए गए, लेकिन ऑपरेशन सफल नहीं हुआ और बाद में मरीज को ग्वालियर रेफर करना पड़ा। परिजनों का यह भी दावा है कि जब उन्होंने पैसे वापस मांगे तो डॉक्टर और उनके बीच विवाद की स्थिति बन गई। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो और ऑडियो भी सामने आया है,
जिससे मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया है। हालांकि इन आरोपों और ऑडियो-वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। जिला अस्पताल में सामने आया यह विवाद केवल एक मरीज का मामला नहीं है, बल्कि यह पूरे सरकारी स्वास्थ्य तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है। अब निगाहें स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन पर हैं कि
वे इस मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाते हैं या फिर यह मामला भी समय के साथ दबा दिया जाएगा। आखिर गरीब मरीज जाएं तो जाएं कहां? सरकारी अस्पताल में भी अगर इलाज पर सवाल उठने लगें, तो भरोसा किस पर किया जाए
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर जिला अस्पताल में हो क्या रहा है?
क्या सरकारी अस्पताल में ऑपरेशन के लिए मरीजों से पैसे लिए जाते हैं? अगर पैसे लिए जाते हैं तो क्या इसकी कोई अधिकृत व्यवस्था है? अगर नहीं, तो फिर मरीज के परिजन ऐसे आरोप क्यों लगा रहे हैं? क्या जिला अस्पताल में इलाज के नाम पर गरीब मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाया जा रहा है? क्या स्वास्थ्य विभाग को इन शिकायतों की जानकारी नहीं है या फिर सब कुछ जानकर भी अनदेखा किया जा रहा है? अगर मरीज को अंत में दूसरे शहर रेफर करना ही था, तो ऑपरेशन की जिम्मेदारी किसकी थी?
