राजेश अग्रवाल आत्महत्या मामले में अदालत सख्त, कहा- जांच के लिए आरोपियों की गिरफ्तारी आवश्यक
छतरपुर। शहर के चर्चित राजेश अग्रवाल आत्महत्या प्रकरण में आरोपियों को बड़ा झटका लगा है। जिला न्यायालय ने आरोपी शरद अग्रवाल, दीपक अग्रवाल और कल्लू कलई की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए स्पष्ट कहा कि जांच अभी जारी है और इस स्तर पर आरोपियों को राहत देना उचित नहीं होगा।
प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश ने सुनाया फैसला
एडवोकेट लखन राजपूत ने जानकारी देते हुए बताया कि तीनों आरोपी लंबे समय से फरार चल रहे हैं। उन्होंने अग्रिम जमानत के लिए जिला अदालत में आवेदन प्रस्तुत किया था, जिस पर 16 जून 2026 को प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश आशीष श्रीवास्तव की अदालत ने सुनवाई करते हुए याचिका खारिज कर दी।
कर्ज और धमकियों से परेशान होकर राजेश अग्रवाल ने उठाया था आत्मघाती कदम
पुलिस जांच के अनुसार मृतक राजेश अग्रवाल लगातार कर्ज के दबाव और आरोपियों द्वारा दी जा रही धमकियों से परेशान थे। मर्ग जांच के दौरान मिले सुसाइड नोट में भी कर्जदाताओं द्वारा प्रताड़ित किए जाने का उल्लेख सामने आया है।
इसी आधार पर थाना ओरछा रोड में बीएनएस की धारा 108, 61(2) और 351(2) के तहत रोहित पटैरिया, शरद अग्रवाल, दीपक अग्रवाल और कल्लू कलई के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई थी।
अभियोजन का तर्क : आरोपी साक्ष्यों को प्रभावित कर सकते हैं
मामले में शासकीय अधिवक्ता पंकज पाठक ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि आरोपी लगातार मृतक पर कर्ज वसूली के लिए दबाव बना रहे थे।
उन्होंने बताया कि मृतक और आरोपियों के बीच हुई बातचीत की सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) की भी जांच कराई जा चुकी है। अभी कई महत्वपूर्ण तथ्यों की पुष्टि होना बाकी है और यदि आरोपियों को अग्रिम जमानत दी जाती है तो वे गवाहों को प्रभावित करने और साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकते हैं।
अदालत की टिप्पणी : आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण के मामलों में पूछताछ बेहद जरूरी
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण जैसे मामलों में प्रत्यक्ष साक्ष्य आसानी से उपलब्ध नहीं होते। ऐसे मामलों में आरोपियों से पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
न्यायालय ने यह भी माना कि आरोपियों को राहत मिलने पर गवाहों को प्रभावित करने और जांच को बाधित करने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
मृतक की पत्नी ने अदालत में जताई आपत्ति
सुनवाई के दौरान मृतक की पत्नी ने लिखित आपत्ति प्रस्तुत करते हुए कहा कि राजेश अग्रवाल परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे और उन्हें लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित एवं धमकाकर आत्महत्या करने के लिए मजबूर किया गया।
गिरफ्तारी का रास्ता साफ, अब पुलिस कार्रवाई पर नजर
अदालत द्वारा अग्रिम जमानत खारिज किए जाने के बाद अब मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी और आगे की पुलिस कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। शहर की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि फरार आरोपियों तक पुलिस कब पहुंचती है।
