इस बार अमावस्या पर बनने वाला दुर्लभ अमृत सिद्धि योग बहुत शुभ माना जा रहा है. इस पावन संयोग में देव, ऋषि और पितरों के लिए तर्पण, तीर्थ श्राद्ध और पितृ श्राद्ध करने से कई गुना पुण्य फल मिलेगा.
हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को बड़ा ही महत्वपूर्ण माना जाता है. वैसे तो सालभर में 12 अमावस्या आती हैं लेकिन सोमवती अमावस्या विशेष महत्व रखती है. इस बार 15 जून की सोमवती अमावस्या बेहद दुर्लभ और पुण्यदायी मानी जा रही है. वर्षों बाद ऐसा शुभ संयोग बन रहा है, जब सोमवार के दिन अमावस्या के साथ अमृत सिद्धि योग का प्रभाव रहेगा. उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित अमर डिब्बेवाला ने बताया कि ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की यह अमावस्या पुरुषोत्तम मास की पूर्णता के साथ आएगी. इस दिन मृगशिरा नक्षत्र, शूल के बाद गण्ड योग और वृषभ से मिथुन राशि में चंद्रमा का संयोग रहेगा. मान्यता है कि इस दिन जप, तप, स्नान, दान और पितृ तर्पण करने से कई गुना पुण्य फल प्राप्त होता है.
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस बार अमावस्या पर बनने वाला दुर्लभ अमृत सिद्धि योग बेहद शुभ माना जा रहा है. इस पावन संयोग में देव, ऋषि और पितरों के लिए तर्पण, तीर्थ श्राद्ध और पितृ श्राद्ध करने से कई गुना पुण्य फल प्राप्त होगा. वहीं मध्यरात्रि की साधना साधकों के लिए विशेष ऊर्जा और आध्यात्मिक सिद्धि प्रदान करने वाली मानी गई है. दशकों बाद बने इस योग में किए गए धार्मिक अनुष्ठानों का फल अमृत के समान बताया गया है.
मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे सूर्य
पुरुषोत्तम मास के कृष्ण पक्ष की यह अमावस्या बेहद विशेष मानी जा रही है. उदयकाल से अमावस्या का स्पर्श होने और दर्श अमावस्या के योग के कारण इसका प्रभाव पूरे दिन रहेगा. साधना, उपासना और आराधना के लिए यह दिन अत्यंत शुभ माना गया है. वहीं इसी दिन दोपहर 12 बजकर 32 मिनट पर सूर्य वृषभ राशि से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे.
