छतरपुर जिले में जून महीने में एक ऐसी सब्जी बाजार में बिकना शुरू हो जाती है जिसे खरीदने के लिए लोगों की भीड़ जम जाती है. इस सब्जी को कमल ककड़ी के नाम से जाना जाता है और क्षेत्रीय भाषा में इसे भसीड़ा कहा जाता है. कमल ककड़ी की बनावट आलू की तरह होती है और इसका स्वाद थोड़ा मीठा और नारियल की तरह होता है. कमल ककड़ी में विटामिन, खनिज और फाइटोन्यूटरिएंट्स होते हैं.
छतरपुर जिले में जून महीने में एक ऐसी सब्जी बाजार में बिकना शुरू हो जाती है जिसे खरीदने के लिए लोगों की भीड़ जम जाती है. इसलिए कुछ ही घंटों में ये बाजार से गायब हो जाती है. यह अपने बेहतरीन स्वाद के लिए जानी जाती है और इसे कमल ककड़ी के नाम से जाना जाता है. हालांकि क्षेत्रीय भाषा में इसे भसीड़ा कहा जाता है और 1 महीने तक ही बाजार में देखने को मिलती है. बता दें इस सब्जी की कोई स्थायी दुकान नहीं होती है. इसके लिए लोगों को शहर में घूमना होता है.
छतरपुर के बाजार में कमल ककड़ी बेचने वाले राजू लोकल 18 से बातचीत में बताते हैं कि वह हर साल 1 महीने तक कमल ककड़ी बेचने का धंधा शुरू कर देते हैं, क्योंकि यह मिलती कम है और इसकी डिमांड ज्यादा रहती है. इस समय तालाबों में पानी कम हो जाता है तो कमल की जड़ खोदना आसान हो जाता है.
राजू बताते हैं कि कमल ककड़ी फसल पानी में ही होती है. पानी के अंदर ही इसकी खुदाई करनी होती है. जमीन से एक से डेढ़ फुट नीचे यह फैली रहती है. मैं खुद गांव के लोगों से मंगवाता हूं. अभी जून महीने मेंछतरपुर बाजार में आना शुरू हो जाती है, लेकिन कुछ ही लोग बेचते दिखाई देते हैं. अभी मैंने यहां ठेला लगा रखा है लेकिन मैं अपनी लोकेशन बदलता रहता हूं. क्योंकि हमारी कोई स्थायी दुकान नहीं होती है.
