डिजिटल प्रताडऩा और शर्म का चक्रव्यूह
मनोदर्पण सर्वे के अनुसार लगभग 25 प्रतिशत छात्र अकेलेपन से जूझ रहे हैं। सबसे चिंताजनक पहलू डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होने वाली ट्रोलिंग है। छात्र फर्जी प्रोफाइल, ऑनलाइन मजाक और अपमानजनक संदेशों का शिकार हो रहे हैं, लेकिन शर्म और डर के कारण वे अपने माता-पिता या शिक्षकों से कुछ भी साझा नहीं कर पा रहे हैं। छतरपुर के विशेषज्ञों का मानना है कि यह खामोशी बच्चों के व्यक्तित्व को अंदर ही अंदर खोखला कर रही है।
बेटियों पर जिम्मेदारी का भारी बोझ
सर्वे में मध्य प्रदेश के 18929 विद्यार्थियों सहित देश के करीब 3.8 लाख छात्रों को शामिल किया गया। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि….
जिम्मेदारी का अहसास- लडक़ों (72-75 प्रतिशत) के मुकाबले लड़कियों में बेहतर प्रदर्शन की जिम्मेदारी (85 प्रतिशत से अधिक) कहीं ज्यादा है।
असफलता का डर- समाज में अपनी जगह बनाने और उम्मीदों पर खरा उतरने का दबाव छात्राओं में भविष्य को लेकर गहरी चिंता पैदा कर रहा है।
बड़ी कक्षाओं में बढ़ता अविश्वास और घटता मनोबल
जैसे ही छात्र मिडिल स्कूल से निकलकर हाई स्कूल (कक्षा 9वीं से 12वीं) में प्रवेश करते हैं, उनकी मानसिक स्थिति में गिरावट देखी गई है।
घटता लचीलापन- कक्षा 6-8 के 50 प्रतिशत बच्चे चुनौतियों से लडऩे में खुद को सक्षम पाते हैं, लेकिन बड़ी कक्षाओं में यह आत्मविश्वास गिरकर 43 प्रतिशत रह जाता है।
प्रतिष्ठा की चिंता- करीब 32 प्रतिशत छात्र इस तनाव में जीते हैं कि कम अंक आने पर साथियों और समाज के बीच उनका सम्मान खत्म हो जाएगा।
संवादहीनता- प्रतियोगिता के इस दौर में छात्र एक-दूसरे पर भरोसा करना छोड़ रहे हैं और मन की बातें साझा करना बंद कर चुके हैं।
अभिभावकों के लिए विशेषज्ञ सलाह
संवाद ही समाधान है- बच्चों के साथ रोजाना समय बिताएं। उनके व्यवहार में बदलाव या चुप्पी को अनदेखा न करें।
साइबर साक्षरता- बच्चों को केवल स्मार्टफोन देना काफी नहीं है, उन्हें प्राइवेसी सेटिंग्स और ऑनलाइन खतरों के बारे में समझाना भी जरूरी है।
भरोसे का वातावरण- बच्चों को यह विश्वास दिलाएं कि परीक्षा के अंक उनकी योग्यता का एकमात्र पैमाना नहीं हैं। उन्हें सजा के डर से मुक्त रखें ताकि वे ट्रोलिंग या अन्य समस्याओं पर खुलकर बात कर सकें।
मुफ्त मदद के लिए यहां करें संपर्क
यदि कोई छात्र मानसिक दबाव या डिजिटल प्रताडऩा महसूस कर रहा है, तो भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की मनोदर्पण हेल्पलाइन एक बड़ा सहारा है। यहां अनुभवी मनोवैज्ञानिक आपकी पहचान गुप्त रखकर उचित मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। अभिभावक भी बच्चों के बदलते व्यवहार को समझने के लिए इस सेवा का लाभ ले सकते हैं।
