जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह की विदाई समारोह में एक ऐसा निर्णय सामने आया, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। न्यायिक सेवा से सेवानिवृत्त होने के अवसर पर जस्टिस सिंह और उनकी पत्नी ने देहदान का संकल्प लेते हुए मेडिकल कॉलेज में अपना पंजीयन कराया।
जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह ने कहा कि मृत्यु के बाद उनका और उनकी पत्नी का शरीर मेडिकल छात्रों की पढ़ाई, शोध और चिकित्सा शिक्षा के कार्यों में उपयोग किया जा सकेगा। उनके इस मानवीय निर्णय की समारोह में उपस्थित लोगों ने सराहना की।
इसके साथ ही जस्टिस सिंह ने अपनी सेवा अवधि के दौरान प्राप्त होने वाली जीपीएफ (GPF) राशि में से 1 करोड़ 1 लाख रुपये प्रधानमंत्री केयर्स फंड में दान करने की घोषणा भी की। उनके इस कदम को सामाजिक सेवा और जनहित के प्रति समर्पण का उदाहरण माना जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह ने 31 मई 1990 को न्यायिक सेवा में प्रवेश किया था। करीब 36 वर्षों के अपने न्यायिक करियर में उन्होंने 8,788 मुकदमों का निराकरण किया और न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
विदाई समारोह के दौरान सहकर्मियों, न्यायिक अधिकारियों और उपस्थित गणमान्य लोगों ने उनके कार्यकाल की उपलब्धियों को याद करते हुए उन्हें भावभीनी शुभकामनाएं दीं। जस्टिस सिंह के देहदान और दान की घोषणा को समाज के लिए प्रेरणादायक कदम बताया गया।