आजमगढ़. बेटी का सम्मान होना चाहिए… मैं पिछले दिनों देख रहा था,समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की पुत्री के खिलाफ कुछ लोगों ने गलत टिप्पणियां की थीं. मेरे संज्ञान में आया, मैंने तत्काल पुलिस से कहा इसमे एफआईआर दर्ज कराओ. बेटी के खिलाफ कोई भी अपमानजनक टिप्पणी स्वीकार नही है. बेटी बेटी होती है. हम तो उस संस्कार में पले हैं, जहां कहा जाता है गांव की बेटी सबकी बेटी. यह बात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आजमगढ़ की जनसभा में कही.
हालांकि, उन्होंने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव को नसीहत भी दे डाली. मुख्यमंत्री ने कहा दूसरों को तो उपदेश देते हो, अपने चेले-चपाटों को भी थोड़ा उपदेश दे दो की अपनी भाषा को संयम कर लें!! दूसरों के ऊपर टिप्पणी करने के पहले स्वयं भी सोचा करो कि उनके लोग किस प्रकार की भाषा का प्रयोग करते हैं. अपने लोगो को संस्कारित करें, उन्हें समझाओ, नहीं कर सकते तो उन्हें हमारे हवाले कर दो.
बेटी की शिक्षा और शादी की स्कीम भी हमारे पास
सीएम योगी ने कहा कि आज बेटी की शिक्षा और बेटी की शादी की स्कीम भी हमारे पास है. 2017 और 2014 के पहले क्यों नहीं हुआ? एक्सप्रेस-वे 2017 के पहले क्यों नहीं बन पाया? ये विश्वविद्यालय भी पहले क्यों नहीं बन पाया? नर्सिंग कॉलेज क्यों नहीं बन पाया? कारण था करने की इच्छा शक्ति नहीं थी. युवाओं को नौकरी क्यों नहीं मिल पाई? कनेक्टिविटी इतनी अच्छी क्यों नहीं आ पाई थी?
गोरखपुर जाने के लिए आसपास का व्यक्ति यहां से चलता है तो एक घंटे में गोरखपुर, मात्र डेढ़ से 1.75 घंटे में वाराणसी पहुंचता है, ढ़ाई घंटे में लखनऊ पहुंचता है. उन्होंने कहा कि हमने गति बढ़ाने का काम, हर गरीब को सिर ढकने के लिए छत, हर गरीब के घर में शौचालय, हर बेटी की सुरक्षा की व्यवस्था, हर व्यापारी को भी सुरक्षा की व्यवस्था किया है.
हम बिना भेदभाव के सुरक्षा देंगे. बिना भेदभाव के शासन की योजना से भी लोगों को जोड़ेंगे. लेकिन अगर किसी ने गरीब की जमीन को हड़पने का काम किया, बेटी की सुरक्षा में सेंध लगाया और किसी व्यापारी के साथ भी जबरदस्ती करने का काम किया तो फिर हम उसकी गारंटी नहीं ले पाएंगे.
किस पीड़ा का किया जिक्र?
आजमगढ़ जिले को विकास परियोजनाओं की सौगात देते हुए मुख्यमंत्री ने एक जनसभा को संबोधित किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि जिसका अपना गौरवशाली इतिहास रहा, साहित्यिक साधना का केंद्रबिंदु रहा हो, देश की आज़ादी के आंदोलन में बढ़ चढ कर हिस्सा लिया हो, जहां ऊर्जावान युवा हों, वह जनपद पहचान का मोहताज क्यों हो गया. यही प्रश्न लेकर मैं बार-बार आजमगढ़ आता हूं. यही हम सबकी भी पीड़ा है, जिन्होंने हम सबको बांटा था, वो बार- बार आपका समर्थन पाते थे, वो आपके हितैषी नहीं हैं.
सुहेलदेव के लिए क्या कहा?
मुख्यमंत्री महाराजा सुहेलदेव जैसा भारत का अमर सेनानी राष्ट्रनायक ने विदेशी आक्रांताओं को नेस्तनाबूद किया. विदेशी आक्रांता महाराजा सुहेलदेव के डर के कारण भारत की धरती पर नहीं आता था. फिर हम जाति, क्षेत्र, भाषा, परिवारवाद के नाम पर बंटने लगे. बहराइच में आयोजन आक्रांता सालार मसूद के नाम पर होता था, हम लोगों ने कहा गाजी के नाम पर नहीं महराजा सुहेलदेव के नाम पर आयोजन होने चाहिए.
