जानलेवा समस्या से निपटने के लिए भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन काम करने वाले भारतीय ऊष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान पुणे ने एक बेहतरीन डिजिटल समाधान खोज निकाला है।
बुंदेलखंड के छतरपुर, टीकमगढ़, पन्ना और आसपास के जिलों में हर साल मानसून के दस्तक देते ही ग्रामीण अंचलों से आकाशीय बिजली (वज्रपात) के कारण होने वाली मौत की दर्दनाक खबरें सामने आने लगती हैं। खेतों में काम करने वाले किसान, खुले आसमान के नीचे मजदूरी करने वाले मजदूर और जंगलों में मवेशी चराने वाले चरवाहे अक्सर इस प्राकृतिक आपदा का शिकार हो जाते हैं। इस जानलेवा समस्या से निपटने के लिए भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन काम करने वाले भारतीय ऊष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान पुणे ने एक बेहतरीन डिजिटल समाधान खोज निकाला है। विभाग द्वारा विकसित किया गया दामिनी ऐप अब बुंदेलखंड के ग्रामीण इलाकों में लोगों के लिए एक अभेद्य सुरक्षा कवच साबित होने जा रहा है, जो आकाशीय बिजली गिरने से ठीक 30 मिनट पहले अलर्ट जारी कर देता है।
48 आधुनिक सेंसरों का नेटवर्क आसमान की हर हलचल पर रखेगा लाइव नजर
दामिनी ऐप की कार्यप्रणाली पूरी तरह से वैज्ञानिक, सटीक और शत-प्रतिशत भरोसेमंद है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार देश भर में 48 अत्याधुनिक सेंसरों से सुसज्जित एक विशेष लाइटनिंग लोकेशन नेटवर्क स्थापित किया गया है। यह नेटवर्क आसमान में बादलों की गडगड़़ाहट, उनकी गति और बादलों के बीच पैदा होने वाले घर्षण को लाइव ट्रैक करता है। जैसे ही मौसम खराब होता है और बिजली गिरने की स्थिति बनती है, यह सेंसर नेटवर्क तुरंत सक्रिय हो जाता है और उपयोगकर्ता के मोबाइल पर आधे घंटे पहले ही यह लाइव जानकारी भेज देता है कि उसके 40 किलोमीटर के दायरे में किस जगह पर वज्रपात होने की सबसे ज्यादा आशंका है।
सिर्फ अलर्ट नहीं, संकट के समय जान बचाने के वैज्ञानिक नियम भी बताएगा यह ऐप
नौगांव कृषि विज्ञान केंद्र डॉ. राजीव सिंह ने बताया कि दामिनी ऐप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह केवल चेतावनी देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ता। इस ऐप में बहुत ही सरल और स्थानीय भाषा में यह समझाया गया है कि बिजली कडकऩे के दौरान नागरिकों को क्या करना चाहिए और क्या करने से बचना चाहिए। ऐप में दिए गए सुरक्षात्मक निर्देशों के मुताबिक, जब आसमान में बिजली कडक़ रही हो तो कभी भी खुले खेत, ऊंचे पेड़ों के नीचे, पहाड़ी रास्तों या तालाब के किनारे शरण नहीं लेनी चाहिए। घर के भीतर रहने वाले लोगों को धातु के पाइप, बर्तन धोने, मोबाइल चार्जिंग पर लगाने और लैंडलाइन फोन का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति खुले मैदान में फंस गया है और आसपास कोई पक्का मकान नहीं है, तो उसे तुरंत दोनों पैरों को आपस में सटाकर घुटनों के बल बैठ जाना चाहिए और अपने दोनों हाथों से कान बंद कर लेने चाहिए। इस दौरान छाते का उपयोग भूलकर भी नहीं करना चाहिए क्योंकि छाते की धातु की रॉड बिजली को अपनी ओर खींच सकती है।
