राजकुमार शर्मा की बसों से यात्रियों से ज़्यादा माल ढुलाई, सरकार को लाखों का चूना
छतरपुर। गुलगंज थाना क्षेत्र के डोंगरपूरा निवासी कुख्यात बस कारोबारी राजकुमार शर्मा एक बार फिर ज़िले की सुर्खियों में है। अवैध बस संचालन, लाखों की टैक्स चोरी और हिंदू विवाह अधिनियम का उल्लंघन कर दो शादियाँ करने जैसे गंभीर आरोपों से घिरा यह कारोबारी अब सोशल मीडिया का सहारा लेकर अपनी वर्षों पुरानी और बदनाम छवि को चमकाने की कोशिश कर रहा है। वह खुद को ‘समाजसेवी’ और ‘ज़िम्मेदार व्यवसायी’ के तौर पर पेश करने का ढोंग कर रहा है।
कानून की धज्जियाँ: पहली पत्नी के होते दूसरी शादी
समाज के बीच समाजसेवी की झूठी छवि गढ़ने की कोशिशों के बावजूद, राजकुमार शर्मा का निजी जीवन सवालों के घेरे में है। विश्वसनीय जानकारी के अनुसार, उनकी पहली पत्नी और बेटी के जीवित रहते हुए भी उन्होंने दूसरी शादी कर ली है। हिंदू विवाह अधिनियम के अनुसार, पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी करना पूरी तरह अवैध है और कानून का स्पष्ट उल्लंघन है। इतने गंभीर उल्लंघन के बावजूद, अब तक इस मामले पर कोई कार्रवाई न होना प्रशासनिक और कानूनी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
टैक्स चोरी का गोरखधंधा: परिवहन विभाग की चुप्पी
शर्मा की दिल्ली-छतरपुर रूट पर चलने वाली बसों में अवैध माल ढुलाई का एक बड़ा गोरखधंधा चल रहा है। इन बसों में यात्रियों की सुविधा से ज़्यादा, गैरकानूनी तरीके से माल ढोया जाता है। इस अवैध ढुलाई के चलते आम यात्रियों को परेशानी होती है, वहीं टैक्स चोरी कर राज्य सरकार को लाखों रुपये का बड़ा नुकसान पहुँचाया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि परिवहन विभाग की कथित मिलीभगत से यह अवैध खेल वर्षों से बिना रोक-टोक जारी है, जिस पर कार्रवाई करने की बजाय विभाग ने रहस्यमय मौन साध रखा है।
अवैध कमाई से नेता बनने की चाहत
अवैध कारोबार से करोड़ों की संपत्ति अर्जित करने के बाद शर्मा को नेता बनने का शौक चढ़ा। उन्होंने कई राजनीतिक दलों के दरवाज़े खटखटाए, मगर उनकी विवादित छवि के कारण किसी ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया। आखिरकार, सत्ता से बाहर रही कांग्रेस पार्टी के कुछ नेताओं ने उन्हें पनाह दी, जिसके बाद उन्होंने बिजावर विधानसभा सीट से टिकट की दावेदारी भी पेश कर दी थी। हालांकि, उनका विवादित चरित्र और आपराधिक पृष्ठभूमि उजागर होने के बाद पार्टी ने भी उनकी दावेदारी को खारिज कर दिया
