सचिव के चाचा के समूह को अनुबंध मिलने का आरोप, दूसरी गौसेवी संस्थाओं को मौका नहीं मिलने की शिकायत!
छतरपुर। मध्य प्रदेश सरकार बेसहारा गोवंश को संरक्षण देने के लिए गौशालाओं का संचालन कर रही है, लेकिन छतरपुर जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत गठेवरा की गौशाला की स्थिति कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। जिला मुख्यालय से महज पांच किलोमीटर दूर स्थित इस गौशाला में गोवंश की जगह गधों के दिखाई देने की तस्वीरें सामने आई हैं। वहीं, गौशाला परिसर में कथित शराबखोरी और पार्टी किए जाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं।
लेकिन इस पूरे मामले में अब एक और अहम सवाल सामने आया है—आखिर गौशाला के संचालन का अनुबंध किसे मिला है और क्या दूसरी गौसेवी संस्थाओं को भी काम करने का अवसर दिया जा रहा है?
🎙️ अनुबंध को लेकर रिश्तेदारी का सवाल!
स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि ग्राम पंचायत के सचिव के चाचा के समूह के पास गौशाला संचालन का अनुबंध है। आरोप यह भी है कि इस व्यवस्था के कारण दूसरी संस्थाओं को गौसेवा करने का अवसर नहीं मिल पा रहा है।
यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह जांच का विषय है कि अनुबंध किस प्रक्रिया के तहत दिया गया, चयन के लिए क्या नियम अपनाए गए और क्या अन्य पात्र गौसेवी संस्थाओं को आवेदन करने तथा प्रतिस्पर्धा का उचित अवसर मिला?
सवाल यह भी है कि क्या गौशाला का संचालन गौसेवा के उद्देश्य से हो रहा है या अनुबंध की व्यवस्था केवल औपचारिकता बनकर रह गई है?
हालांकि, अनुबंध और रिश्तेदारी से जुड़े इन आरोपों की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों तथा अधिकारियों के पक्ष से किया जाना आवश्यक है।
🐴 गौशाला में गधे, गोवंश कहां?
गठेवरा की गौशाला की तस्वीरों में परिसर के अंदर गधे दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जिस स्थान पर गोवंश के संरक्षण और भरण-पोषण की व्यवस्था होनी चाहिए, वहां गोवंश की मौजूदगी और देखभाल की वास्तविक स्थिति क्या है?
यदि गौशाला लंबे समय से खाली पड़ी है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है? क्या नियमित निरीक्षण किया गया? क्या चारा, पानी और रखरखाव की व्यवस्था का सत्यापन हुआ?
🍺 गौशाला परिसर में शराबखोरी के आरोप
गौशाला परिसर को शराबखोरी और पार्टी का अड्डा बनाए जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं। यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो सरकारी संपत्ति के उपयोग और गौशाला की निगरानी व्यवस्था की जांच जरूरी हो जाती है।
❓ प्रशासन से सीधे सवाल
– गौशाला के संचालन का अनुबंध किस समूह या संस्था को और किस प्रक्रिया के तहत दिया गया?
– क्या ग्राम पंचायत सचिव और अनुबंधधारी समूह के बीच रिश्तेदारी की आधिकारिक पुष्टि होती है?
– दूसरी पात्र गौसेवी संस्थाओं को अवसर देने के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई गई?
– गौशाला में वर्तमान में कितने गोवंश हैं और उनके चारे-पानी की व्यवस्था कौन कर रहा है?
– गौशाला परिसर में गधों के रहने और कथित शराबखोरी की शिकायतों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई?
– संबंधित जनपद पंचायत और जिला प्रशासन ने इस मामले में निरीक्षण क्यों और कब किया?
📢 निष्पक्ष जांच की मांग
ग्राम पंचायत गठेवरा की गौशाला के संचालन, अनुबंध प्रक्रिया, गोवंश की वास्तविक संख्या और उपलब्ध संसाधनों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। अनुबंध से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं और यदि किसी प्रकार की अनियमितता प्रमाणित होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
जिला मुख्यालय से महज पांच किलोमीटर दूर गौशाला की यह तस्वीरें और अनुबंध को लेकर उठ रहे सवाल प्रशासन की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं।
अब देखना यह है कि संबंधित अधिकारी इन सवालों का जवाब देते हैं या गौशाला की व्यवस्था पहले की तरह ही सवालों के घेरे में बनी रहती है।
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