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मध्यप्रदेश के दतिया सरकारी नौकरी… लेकिन पहचान “रामेश्वर धाम सरकार ! दतिया नगर पालिका के वार्ड प्रभारी शिवम निचरेले को लेकर ऐसे सवाल उठ रहे हैं, जिनका जवाब अब प्रशासनिक जांच से मिलना जरूरी है। आरोप है कि नौकरी के साथ पर्चा बाबा के भेस में धार्मिक पर्चा दरबार लगाए जा रहे हैं, वहीं मंदिर से लगी वन विभाग की शासकीय जमीन पर बाथरूम शौचालय।
सरकारी सेवाओं के निर्माण कर कब्जे के आरोप भी सामने आए हैं। आखिर सरकारी सेवा के साथ शिवम निचरेले का पर्चा दरबार कैसे? और क्या धर्म की आड़ में शासकीय जमीन पर किसी बड़े साम्राज्य की नींव रखी जा रही है? इन सवालों की पड़ताल करती हमारी खास रिपोर्ट।
रिपोर्ट: दतिया में नगर पालिका के वार्ड 17 के वार्ड प्रभारी शिवम निचरेले को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारी के मुताबिक वे अनुकंपा नियुक्ति के बाद सरकारी सेवा में हैं और नौकरी के साथ पर्चा। बाबा के धार्मिक अनुष्ठान व दरबार लगाते हैं। बाबा के रूप में “रामेश्वर धाम सरकार” नाम का इस्तेमाल किया जाता है और ग्राम भिटौरा के प्रवेश द्वार को दरबार रामेश्वर धाम सरकार के प्रवेश द्वार में बदलने की बात सामने आई है। सवाल है कि सरकारी सेवा में रहते हुए ऐसी गतिविधियां नियमों ताक पर रखकर कैसे संचालित हो रही हैं?
आरोप है कि इन धार्मिक गतिविधियों से जुड़ी आय के साथ मंदिर से लगी शासकीय भूमि पर कब्जे या अतिक्रमण की कोशिश भी हुई है। इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद होगी। जिला कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े ने शासकीय जमीन के अतिक्रमण की जानकारी पर CMO और तहसीलदार को जांच के निर्देश देने और नियमानुसार जमीन मुक्त कराने की बात कही है।
नगर पालिका CMO के बयान में कर्मचारी की उपस्थिति, कामकाज और वार्ड प्रभारी की जिम्मेदारियों को लेकर भी सवाल सामने आए हैं। CMO ने कर्मचारी के स्थायी होने की बात कहते हुए नियमानुसार मामला वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष रखने की बात कही है।
वहीं शासकीय जमीन की स्थिति को लेकर मौकाए मौजूद रेंज कर्मचारी ने कहा कि संबंधित जमीन सरकारी है और इसमें कुछ आदिवासी जमीन भी शामिल है। मुताबिक जमीन पर कब्जा हुआ है और वह करीब छें महीने से शासकीय जमीन पर बाथरूम निर्माण एवं अन्य निर्माण के जरिए जमीन को कब्जाने की कोशिश होते देख रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके वहां आने से करीब पांच महीने पहले कोई दूसरा व्यक्ति उनकी जगह नौकरी कर रहा था और उनके अनुसार उसी दौरान से यह सब चल रहा था। चौकीदार ने कहा कि पिछले पांच महीनों से वह खुद भी इस स्थिति को देख रहे हैं। वार्ड प्रभारी शिवम निचरेले
सरकारी नौकरी सेवा उसके साथ बाबा बनकर दरबार लगाने के लिए? क्या सरकारी कर्मचारी ऐसी धार्मिक गतिविधियों से आय अर्जित कर सकता है? और यदि शासकीय जमीन पर कब्जे के आरोप सही पाए जाते हैं तो कार्रवाई कब होगी?
आस्था का सम्मान अपनी जगह है, लेकिन शासकीय सेवा, सरकारी जमीन और कथित आर्थिक गतिविधियों के बीच नियमों की अनदेखी हुई है या नहीं, इसका जवाब प्रशासन की जांच से ही सामने आएगा। कहीं धर्म की आड़ में किसी बड़े साम्राज्य की नींव तो नहीं रखी जा रही?
दतिया विधानसभा उपचुनाव 2026 के दौरान आदर्श आचार संहिता लागू होने के बावजूद, उनका एक चुनावी ड्यूटी पत्र (कर्तव्य प्रमाण-पत्र) वायरल हुआ है, जिसमें ड्यूटी पर जाने के बजाय गुरु पूर्णिमा पर अपने दीक्षार्थियों को दीक्षा देने और धार्मिक आयोजन करने का मामला सामने आया है; जिसकी पुष्टि एक वायरल वीडियो से भी हो रही है। भी एक बड़ा अहम मुद्दा है। अब देखना है कि शासन की तरफ से क्या कार्रवाई होती है
वाइट== दतिया कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े
