आस्ट्रेलिया की 8 दिवसीय यात्रा में पहुंचे बागेश्वर धाम पीठाधीश पं. धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने वहां की संसद में विश्व शांति का संदेश दिया। यह पहला अवसर है जब किसी भारतीय संत ने आस्ट्रेलिया की संसद में सनातन संस्कृति और विश्व शांति का संदेश दिया है। इससे यह स्पष्ट है कि सनातन का विश्वास आस्ट्रेलिया की संसद तक पहुंच चुका है। बागेश्वर महाराज ने कहा कि जब मन में शांति होगी तभी विश्व की शांति की कल्पना की जा सकती है। अशांत मन से समाज और राष्ट्र में शांति नहीं आ सकती। राष्ट्रगान और हनुमान चालीसा के साथ विश्व शांति की चर्चा शुरू हुई।
आस्ट्रेलिया की राजधानी कैनबरा स्थित संसद में बागेश्वर धाम सरकार धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का ऐतिहासिक संबोधन हुआ। उन्होंने पूरी दुनिया को शांति का संदेश दिया। बागेश्वर महाराज का यह ऑस्ट्रेलिया दौरा इसलिये खास माना जा रहा है क्योंकि यहां पहली बार किसी भारतीय संत ने ऑस्ट्रेलिया की संसद में आध्यात्मिक प्रवचन दिया। इस अवसर पर बागेश्वर महाराज ने कहा कि यहां के मूल निवासी, प्रशासन के अधिकारी और दुनिया के 150 करोड़ सनातनियों की ओर से धन्यवाद कि आप विश्व शांति की चर्चा के लिए इकट्ठा हुए हैं। उन्होंने ईरान-अमेरिका युद्ध का उल्लेख करते हुए कहा कि मैं रास्ते में था तो पता चला कि मिडिल ईस्ट में जो युद्ध चल रहा था वहां सीजफायर हो गया। भगवान करे सीजफायर बना रहे। ऑस्ट्रेलिया की संसद से बैठकर हम इतना कह सकते हैं विवाद कोई रास्ता नहीं, संवाद रास्ता है। उन्होंने कहा कि विनाश करना है तो युद्ध को चुनो और विकास के लिए बुद्ध को चुनो। बागेश्वर महाराज ने कहा कि अंदर के तत्व को जान लेना ही शांति है। आप तब तक अशांत हैं जब तक कुछ पाने की इच्छा है। बड़े-बड़े राजा, नौकर चाकर रखने वाले लोग आशांत रहते हैं लेकिन साधु-संतों फकीरों को देखो, वे कितने शांत हैं। जब तक अतृप्त रहोगे अशांत रहोगे और जब तृप्त हो जाओगे तब शांत हो जाओगे।
भारत ने पूरी दुनिया को परिवार की दृष्टि से देखा
उन्होंने भारत की संस्कृति और सभ्यता का उल्लेख करते हुए कहा कि हम बहुत गौरवशाली हैं और उस सनातन परंपरा से आते हैं जहां शांति से ही शुरुआत होती है। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया ने सभी देशों को व्यापार की दृष्टि से देखा लेकिन भारत ने पूरी दुनिया को परिवार की दृष्टि से देखा। उन्होंने कहा कि स्त्रियों को दुनिया ने भोग्या की दृष्टि से देखा लेकिन हमने पूज्या की दृष्टि से देखा।
संवाद ही एकमात्र रास्ता..
महाराजश्री ने ईरान और अमेरिका को शांति का संदेश देते हुए कहा कि सबसे बड़ी लड़ाई महाभारत हमारे देश में लड़ी गई और जिस जमीन पर महाभारत की लड़ाई लड़ी गई वह जमीन आज भी पड़ी है लेकिन जो लड़े वो सब निपट गए। इसलिए कहता हूं कि विवाद कोई रास्ता नहीं है। संवाद ही एकमात्र रास्ता है।
