डबरा के पिछोर इलाके में दो दिन पहले एक बुजुर्ग महिला का संदिग्ध हालत में शव मिला था। पुलिस ने 48 घंटे के अंदर पूरे मामले का खुलासा कर दिया। आरोपी को गिरफ्तार भी कर लिया है और चश्मदीद गवाह के बयान भी दर्ज कर लिए हैं। महिला की हत्या उसके बेटे ने की थी। जिस मां ने पाल-पोसकर बड़ा किया, उसी ने गला घोटकर मां की निर्मम हत्या कर दी। बुजुर्ग लक्ष्मी रजक पत्नी स्वर्गीय बालकिशन रजक घर पर मृत अवस्था में पड़ी मिली थी। पहली नजर में मामला हत्या का था, क्योंकि महिला के गले में स्टॉल था। जिससे स्पष्ट था कि उसी से गला घोंटकर उसकी हत्या की गई है। मामले में शक की सुई पहले दिन से ही महिला के बेटे संजय रजक साल पर टिकी थी, पर वह पुलिस को लगातार नई-नई कहानी सुना कर गुमराह कर रहा था। मामले में एडिशनल एसपी देहात जयराज कुबेर पूरे घटनाक्रम पर अपनी नजर बनाए हुए थे तो थाना प्रभारी पिछोर शिवम राजावत टेक्निकल साक्ष्य के आधार पर कड़ी से कड़ी जोड़ रहे थे। इसमें कुछ फुटेज भी हाथ आए और एक चश्मदीद आजम खान पुलिस की निगाह में आ गया। सख्ती से पूछताछ की तो कहानी परत दर परत खुलती चली गई आरोपी संजय रजक की मां लक्ष्मी देवी कस्बे में ही पुड़िया सिगरेट बेचकर जीवन यापन कर रही थी। बेटे को हर बुरी आदत थी, चाहे वह जुआ खेलने की हो या फिर नशे की। संजय की पत्नी ने उस पर केस लगाया था। जिस मामले में वह झांसी जेल में बंद था। मां ने जैसे तैसे डेढ़ लाख रुपए देकर मामले में सेटलमेंट कर उसे झांसी जेल से छुड़ाया था, लेकिन उसकी हरकतें नहीं सुधरी। अनीता नाम की विधवा महिला से उसके संबंध थे और वह मां से उसे घर पर रखने की जिद करता था। घर में जवान बहन होने के चलते हर बार मां उसे मना करती थी। इसी कारण लड़ाई करने के बाद मां की गला घोंटकर हत्या कर दी। संजय की स्थिति ठीक नहीं थी। नशे की आदत के चलते वह हर काम करने को तैयार रहता था। वह टेकनपुर स्थित एक होटल और ड्राइवरी का काम करता था, जिससे वह अपना जीवन यापन कर रहा था। घटना वाली रात भी एक गाड़ी सीसीटीवी फुटेज में नजर आई। हत्या की रात सिकंदर और फिरोज ने थाने पहुंचकर पुलिस को सूचना दी, लेकिन जिस युवक की मां की हत्या हुई थी, वह न तो थाने पहुंचा और न ही उसके व्यवहार में कोई दुख नजर आया। इससे पुलिस को शक हुआ, लेकिन संजय की पहले की लूट-चोरी और उलझी कहानियों के कारण पुलिस तुरंत किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी। थाना प्रभारी शिवम राजावत ने संजय को मुख्य संदेही मानते हुए सीसीटीवी फुटेज खंगालना शुरू किया। जांच के दौरान एक फुटेज में संजय का दोस्त आजम खान घटना की रात उसके साथ बाइक पर जाता हुआ दिखाई दिया। कुछ दूरी पर संजय ने उसे रोका और दोनों के बीच बातचीत हुई। इसी को आधार बनाकर पुलिस ने सख्ती बरती तो पूरे मामले का खुलासा हो गया।
