66 साल पुराने टीबी अस्पताल की शिफ्टिंग पर संग्राम।
सांसद, विधायक और नपा अध्यक्ष विरोध में, बीच शहर में संक्रामक बीमारी का खतरा।
जिले के नौगांव में 1959 से स्थापित टीबी अस्पताल अब विवादों के घेरे में है यह अस्पताल न केवल जिले बल्कि बुंदेलखंड महाकौशल और उत्तर प्रदेश सीमा से आने वाले मरीजों के लिए जीवनदायिनी जगह साबित हुआ है। कारण है कि जब स्थानांतरण की चर्चा शुरू हुई
है स्टैंड पास 25 बीघा परिसर में बने इस अस्पताल तक मरीजों की पहुंच आसान रही है। यही कारण है कि यह क्षेत्र का एकमात्र डीआर-टीभी सेंटर होने के बावजूद मरीजों के लिए राहत का बंद रहा है। अब जन नए सिविल अस्पताल का निर्माण हो रहा है स्वास्थय विभाग ने संकेत दिए है कि टीबी अस्पताल को पुराने सिविल अस्पताल भवन में शिफ्ट किया जा सकता है। यहीं से विवाद के प्रीन्म लिया। जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन की इस योजना पर सख्त आपत्ति दर्ज कराई है। नौगांव के नागरिक भी मुखर होकर सामने आए हैं। उनका कहना है कि मौजूदा
कैंपस में ही नया सिविल अस्पताल और टीबी अस्पताल दोनों संचालित किया सकते है। पुराने सिविल अस्पताल भवन का उपयोग आयुर्वेदिक अस्पताल मा स्वास्थ्य विभाग की डिस्पेंसरी के लिए होना चाहिए। शहर के बीचों बीच संक्रामक रोग का अस्पताल लाना आने वाले समय में भयावह स्थिति पैदा कर सकता है। फिलहाल मामला सिर्फ प्रस्तावों और चर्चाओं तक सीमित है, लेकिन असमंजस और आशंका ने शहरवासियों की नींद उड़ा दी है।
सवाल अब भी खड़े हैं
क्या प्रशासन नागरिकों की आशंकाओं और जनप्रतिनिधियों की राय को तवज्जो देगा। या फिर विभागीय योजनाओं के दबाब में बीच शहर में टीबी अस्पताल खोलकर खतरा मोल लेगा। जब मौजूदा कैंपस ही पर्याप्त है तो शिफ्टिंग की जिद आखिर क्यों नौगांव का यह मामला अब सिर्फ अस्पताल की शिफ्टिंग का नहीं रहा, बल्कि यह जनस्वास्थ्य बनाम प्रशासनिक निर्णय की लड़ाई बन गया है। सांसद, विधायक, नपा अध्यक्ष और नागरिक सब एक सुर में कह रहे हैं। टीबी अस्पताल वहीं रहे, जहां से मरीजों को दशकों से राहत मिलती आई है। अब सभी निगाहें प्रशासन पर हैं, जिसका फैसला आने वाले समय में नौगांव की स्वास्थ्य व्यवस्था और लोगों की सुरक्षा दोनों तय करेगा।
