लेकिन 2 नवंबर को खुद धीरेंद्र शास्त्री विवादों में घिर गए. सोशल मीडिया पर ये दावे तेजी से फैलने लगे कि उन्होंने भगवान कृष्ण को लेकर कथिततौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की है. इन दावों के मुताबिक उन्होंने भगवान राम और उनके अनुयायियों की तुलना भगवान कृष्ण और उनके अनुयायियों से की. साथ ही भगवान राम और उनके अनुयायियों को दूसरे पक्ष से बेहतर बताया.
धीरेंद्र शास्त्री ने 3 नवंबर को अपनी टिप्पणी के लिए माफी मांग ली. लेकिन अगर इस घटना को राजनीतिक मुद्दा बनाया जाता है तो अगले साल उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव पर इसका असर पड़ सकता है. धीरेंद्र शास्त्री के बयानों का पहले भी मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की यादव राजनीति पर असर पड़ता रहा है. इसकी वजह समझना जरूरी है.
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को पिछले तीन वर्षों में पहचान की राजनीति से जुड़ा नेता माना जाने लगा है. उन पर अधिकारियों की तैनाती और नियुक्तियों में यादव समुदाय के लोगों को तरजीह देने के आरोप लगते रहे हैं. इसे शायद समुदाय को बढ़ावा देने वाली राजनीतिक रणनीति के हिस्से के तौर पर देखा जाता है.