राजेंद्र भारती को जब बैंक में धोखाधड़ी के मामले में जब तीन साल की सजा हुई थी, तभी से इस बात की संभावना जताई जा रही थी कि यहां पर उपचुनाव होगा. अब आज चुनाव आयोग ने इसकी घोषणा भी कर दी है. बीजेपी खेमे में इसके बाद खुशी की लहर है. आइए जानते हैं कि वह कौन सा केस था, जिसकी वजह से राजेंद्र भारती की विधायकी चली गई थी और अब यहां पर उपचुनाव हो रहा है.
चुनाव आयोग ने मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा में उपचुनाव का ऐलान कर दिया है. यहां पर 30 जुलाई को वोटिंग होगी और 3 अगस्त को मतगणना के बाद चुनाव रिजल्ट घोषित किया जाएगा. राजेंद्र भारती यहां से मौजूदा विधायक थे, लेकिन दिल्ली की एक कोर्ट ने 28 साल पुराने केस में उन्हें तीन साल की सजा सुनाई थी. इसके बाद उनकी विधायकी चली गई थी. इसी वजह से यहां पर उपचुनाव होगा.
चुनाव आयोग की तरफ से बताया गया है कि उपचुनाव की अधिसूचना 6 जुलाई को जारी होगी. वहीं, नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 13 जुलाई, नामांकन पत्रों की जांच 14 जुलाई और नाम वापस लेने की आखिरी तारीख 16 जुलाई तय की गई है.
राजेंद्र भारती ने नरोत्तम मिश्रा को दी थी पटखनी
साल 2023 में जब मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव हुए थे, तब दतिया विधानसभा से राजेंद्र भारती ने भाजपा के दिग्गज नेता नरोत्तम मिश्रा को पटखनी दी थी. तब नरोत्तम मिश्रा की हार पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई थी. अब इस बात की संभावना जताई जा रही है कि बीजेपी की तरफ से नरोत्तम ही उपचुनाव में उम्मीदवार हो सकते हैं. उनके लिए यह बड़ा मौका है कि वह इस सीट को जीतकर खोया सम्मान वापस हासिल कर सकें.
साल 2023 में जब मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव हुए थे, तब दतिया विधानसभा से राजेंद्र भारती ने भाजपा के दिग्गज नेता नरोत्तम मिश्रा को पटखनी दी थी. तब नरोत्तम मिश्रा की हार पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई थी. अब इस बात की संभावना जताई जा रही है कि बीजेपी की तरफ से नरोत्तम ही उपचुनाव में उम्मीदवार हो सकते हैं. उनके लिए यह बड़ा मौका है कि वह इस सीट को जीतकर खोया सम्मान वापस हासिल कर सकें.
क्या था वो केस जिससे गई थी राजेंद्र भारती की विधायकी
साल 1998 का दतिया सहकारी ग्रामीण विकास बैंक से एक एफडी से जुड़ा मामला सामने आया था, जिसके तार राजेंद्र भारती से जुड़े थे. बताया गया कि बैंक के रिकॉर्ड में हेरफेर की गई. इस दौरान एफडी का समय तीन साल का था और उसे बढ़ाकर 15 साल कर दिया गया और ब्याज का पैसा लिया गया. राजेंद्र भारती की मां सावित्री ने श्याम सुंदर श्याम संस्थान की अध्यक्ष रहते हुए दतिया ग्रामीण बैंक में एफडी की थी. उस समय राजेंद्र बैंक के संचालक मंडल के अध्यक्ष थे और अपनी मां द्वारा चलाए जा रहे संस्थान के ट्रस्टी भी थे.
साल 1998 का दतिया सहकारी ग्रामीण विकास बैंक से एक एफडी से जुड़ा मामला सामने आया था, जिसके तार राजेंद्र भारती से जुड़े थे. बताया गया कि बैंक के रिकॉर्ड में हेरफेर की गई. इस दौरान एफडी का समय तीन साल का था और उसे बढ़ाकर 15 साल कर दिया गया और ब्याज का पैसा लिया गया. राजेंद्र भारती की मां सावित्री ने श्याम सुंदर श्याम संस्थान की अध्यक्ष रहते हुए दतिया ग्रामीण बैंक में एफडी की थी. उस समय राजेंद्र बैंक के संचालक मंडल के अध्यक्ष थे और अपनी मां द्वारा चलाए जा रहे संस्थान के ट्रस्टी भी थे.
राजेंद्र भारती को हुई थी तीन साल की सजा
इसी वजह से राजेंद्र भारती पर अपने पद और अधिकारों का गलत उपयोग करने का आरोप लगा. बाद में दिल्ली की एमपी एमएलए कोर्ट ने 28 साल पुराने मामले में उन्हें दोषी माना और तीन साल की सजा सुनाई. इसके अलावा उन्हें अपील करने के लिए 60 दिन का समय भी दिया गया था. अगर किसी विधायक को दो या उससे ज्यादा साल की सजा होती है, तो उसकी सदस्यता खुद समाप्त हो जाती है. बाद में रात में विधानसभा सचिवालय खोलकर उनकी सदस्यता खत्म कर दी गई थी.
इसी वजह से राजेंद्र भारती पर अपने पद और अधिकारों का गलत उपयोग करने का आरोप लगा. बाद में दिल्ली की एमपी एमएलए कोर्ट ने 28 साल पुराने मामले में उन्हें दोषी माना और तीन साल की सजा सुनाई. इसके अलावा उन्हें अपील करने के लिए 60 दिन का समय भी दिया गया था. अगर किसी विधायक को दो या उससे ज्यादा साल की सजा होती है, तो उसकी सदस्यता खुद समाप्त हो जाती है. बाद में रात में विधानसभा सचिवालय खोलकर उनकी सदस्यता खत्म कर दी गई थी.
राजेंद्र भारती कांग्रेस के वरिष्ठ नेता माने जाते हैं और उनके पास अपार अनुभव भी मौजूद है. राजनीति उन्हें विरासत में मिली थी. उनके पिता श्याम सुंदर श्याम भी कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में शुमार थे और दतिया से विधायक रह चुके थे. राजेंद्र खुद दतिया से तीन बार विधायक रह चुके हैं और वह जमीन पर काफी सक्रिय रहते हैं.
