2030 फीफा वर्ल्ड कप का संयुक्त आयोजन स्पेन, पुर्तगाल और मोरक्को कर रहे हैं. फीफा ने अक्टूबर 2023 में इसकी घोषणा की थी और दिसंबर 2024 में इसे अंतिम मंजूरी मिली थी. टूर्नामेंट की तैयारियां जोरों पर हैं, लेकिन मोरक्को में एक चौंकाने वाली और क्रूर खबर सामने आई है.
देश में अनुमानित 30 लाख (3 मिलियन) आवारा कुत्तों को मारने का प्लान चल रहा है, ताकि वर्ल्ड कप के दौरान शहर ‘साफ-सुथरे’ और ‘पर्यटकों के लिए सुरक्षित’ दिखे. पशु अधिकार संगठनों जैसे PETA, International Animal Welfare and Protection Coalition (IAWPC), Eurogroup for Animals और अन्य ने आरोप लगाया है कि मोरक्को सरकार ने कुत्तों की सामूहिक हत्या शुरू कर दी है.पार हो रही क्रूरता की हदें
देश पर आरोप है कि वो बेहद क्रूरता से कुत्तों को मार रहे हैं. ये तरीके बेहद क्रूर हैं, जिसमें जहर (स्ट्रिक्नाइन) खाने में मिलाकर या इंजेक्शन देकर, बंदूकों से गोली मारकर, नेक क्लैंप से पकड़कर ट्रकों में भरकर, फिर फेक डिस्पेंसरी में ले जाकर जिंदा जलाना या मास ग्रेव में फेंकना शामिल है. कई कुत्ते घायल होकर तड़पते रहते हैं, चीखते हैं, लेकिन मौत धीमी आती है. रिपोर्ट्स में कहा गया है कि बच्चे यह सब देखकर ट्रॉमा में हैं. AWPC का दावा है कि 3 मिलियन कुत्ते खतरे में हैं.आवारा कुत्तों से परेशान है देश
मोरक्को में हर साल करीब 3 लाख कुत्ते मारे जाते थे, लेकिन वर्ल्ड कप की वजह से यह संख्या बढ़ गई है. शहरों जैसे माराकेश, फेज, इफ्रेन में ‘क्लीन-अप’ अभियान चल रहा है. इफ्रेन के टूरिज्म काउंसिल प्रेसिडेंट ने CNN को बताया कि वर्ल्ड कप के लिए सड़कों से कुत्तों को हटाया जा रहा है. मोरक्को में स्ट्रे डॉग्स की समस्या पुरानी है. हर साल 1 लाख कुत्ते के काटने की घटनाएं होती हैं. लेकिन पशु अधिकारियों का कहना है कि कटाई (culling) लंबे समय तक समस्या हल नहीं करती. इसके बजाय Trap-Neuter-Release (TNR) प्रोग्राम अपनाना चाहिए, जहां कुत्तों को पकड़कर नसबंदी, वैक्सीनेशन कर वापस छोड़ दिया जाए. मोरक्को ने 2024 में TNR का वादा किया था, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक इसे छोड़कर क्रूर तरीके अपनाए गए हैं.
देश पर आरोप है कि वो बेहद क्रूरता से कुत्तों को मार रहे हैं. ये तरीके बेहद क्रूर हैं, जिसमें जहर (स्ट्रिक्नाइन) खाने में मिलाकर या इंजेक्शन देकर, बंदूकों से गोली मारकर, नेक क्लैंप से पकड़कर ट्रकों में भरकर, फिर फेक डिस्पेंसरी में ले जाकर जिंदा जलाना या मास ग्रेव में फेंकना शामिल है. कई कुत्ते घायल होकर तड़पते रहते हैं, चीखते हैं, लेकिन मौत धीमी आती है. रिपोर्ट्स में कहा गया है कि बच्चे यह सब देखकर ट्रॉमा में हैं. AWPC का दावा है कि 3 मिलियन कुत्ते खतरे में हैं.आवारा कुत्तों से परेशान है देश
मोरक्को में हर साल करीब 3 लाख कुत्ते मारे जाते थे, लेकिन वर्ल्ड कप की वजह से यह संख्या बढ़ गई है. शहरों जैसे माराकेश, फेज, इफ्रेन में ‘क्लीन-अप’ अभियान चल रहा है. इफ्रेन के टूरिज्म काउंसिल प्रेसिडेंट ने CNN को बताया कि वर्ल्ड कप के लिए सड़कों से कुत्तों को हटाया जा रहा है. मोरक्को में स्ट्रे डॉग्स की समस्या पुरानी है. हर साल 1 लाख कुत्ते के काटने की घटनाएं होती हैं. लेकिन पशु अधिकारियों का कहना है कि कटाई (culling) लंबे समय तक समस्या हल नहीं करती. इसके बजाय Trap-Neuter-Release (TNR) प्रोग्राम अपनाना चाहिए, जहां कुत्तों को पकड़कर नसबंदी, वैक्सीनेशन कर वापस छोड़ दिया जाए. मोरक्को ने 2024 में TNR का वादा किया था, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक इसे छोड़कर क्रूर तरीके अपनाए गए हैं.
