टैरिफ के बाद तारीफ, मोदी के लिए दोस्ती का फिर ट्रम्प कार्ड।
अप्रैल से भारत के खिलाफ टैरिफ और खेड़कर दबाव बना रहे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के तेवर ठंडे पड़ते दिख रहे हैं। उन्होंने भारत के साथ जारी तनाव के बीच सोशल मीडिया पोस्ट में शुक्रवार को लिखा था।
कि मैं हमेशा मोदी का दोस्त रहूंगा। वह एक महान प्रधानमंत्री हैं। भारत और अमेरिका का एक बहुत ही खास रिश्ता है। चिंता की कोई बात नहीं। कभी-कभी ऐसे पल आ जाते हैं। इस बयान का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सकारात्मक जवाच दिया। उन्होंने ट्वीट किया कि राष्ट्रपति ट्रम्प की भावनाओं और हमारे संबंधों के सकारात्मक मूल्यांकन की गहराई से सराहना करते हैं तथा उनका पूर्ण रूप से समर्थन करते हैं।
भारत-अमेरिका के बीच बहुत ही सकारात्मक और दूरदर्शी व्यापक और वैश्विक रणनीतिक साझेदारी है। इसके बाद विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने भी कहा कि प्रधानमंत्री अमेरिका के साथ हमारी साझेदारी को बहुत महत्व देते हैं। जहां तक राष्ट्रपति ट्रम्प का सवाल है, पीएम के राष्ट्रपति के साथ हमेशा से बहुत अच्छे व्यक्तिगत संबंध रहे हैं। बता दें कि मोदी और ट्रम्प के बीच फोन पर आखिरी बातचीत 17 जून को हुई थी।
ट्रम्प का नया आदेशः यह 3 सितंबर से लागू होगा। इसमें 44 उत्पादों को टैरिफ से छूट दी गई है। इनमें भारत के भी कुछ उत्पाद हैं। जैसे फार्मास्यूटिकल्स और कृषि रसायन में इस्तेमाल होने वाले केमिकल, स्टील और बैटरी में काम आने वाले निकेल स्क्रैप, एनेस्थीसिया में इस्तेमाल होने वाली दवा लिडोकेन आदि। इससे भारत के 1.5 करोड़ डॉलर के निर्यात को फायदा मिलेगा।
नया पेंचः भारतीय आउटसोर्स कंपनियों को रोकने का ट्रम्प पर दबाव बना रहे समर्थक
राष्ट्रपति ट्रम्प पर उनके कट्टर समर्थक दबाव बना रहे हैं कि वह अमेरिकी कंपनियों को भारतीय तकनीकी कंपनियों को काम आउटसोर्स करने से रोकें या फिर भारतीय कॉल सेंटरों पर किसी तरह का शुल्क लगाएं। ट्रम्प के मेक अमेरिका ग्रेट अगेन आंदोलन के प्रमुख सदस्य चाली कर्क ने कहा है, ‘ट्रम्प इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।” उन्होंने इसके साथ ही साउथ एशिया इंडेक्स की एक पोस्ट को भी रीपोस्ट किया, जिसमें दावा किया गया था कि ट्रम्प आउटसोर्सिंग पर प्रतिबंध लगाने की योजना बना रहे हैं। आंदोलन से जुड़े एक और प्रभावशाली अमेरिकी और ट्रम्प के कट्टर समर्थक जैक पोसोबिएक ने लिखा “आज कॉल सेंटरों पर शुल्क लगाने का एक शानदार दिन है। ट्रम्प के सलाहकार पीटर नवारो भी बिदेशी रिमोट वर्कर्स पर शुल्क लगाने का समर्थन कर चुके हैं। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति की तरफ से अब तक ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है।
भास्कर नॉलेज अमेरिकाः ₹17 लाख करोड़ दे रहा भारतीय आईटी सेक्टर
भारत का तकनीकी सेवा उद्योग 24 लाख करोड़ रु. का है, जो देश की जीडीपी का 9% के आसपास है। अमेरिका हमारी आईटी इंडस्ट्री का सबसे बड़ा भागीदार है। 2021 में अमेरिकी इकोनॉमी में इस इंडस्ट्री का योगदान 17 लाख करोड़ रु. का था, जबकि कमाई १ लाख करोड़ रु. थी। 2024 तक कमाई घटकर 5.50 लाख करोड़ रु. रह गई। इसने अमेरिका में 16 लाख नौकरियां पैदा की। इनमें 2.07 लाख अमेरिकी हैं। टीसीएस, इंफोसिस, एचसीएल, विप्रो आदि मिलकर अमेरिकी टेक उद्योग में 2% कर्मचारी उपलब्ध कराती हैं
यूएनजीएः मोदी नहीं जाएंगे अमेरिका, जयशंकर को मौका
नईदिल्ली | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) की बैठक में शामिल होने अमेरिका नहीं जाएंगे। उनकी जगह विदेश मंत्री एस. जयशंकर जाएंगे। यूएनजीए का 80वां सत्र 9 सितंबर से शुरू होगा, जिसमें जयशंकर का भाषण 27 सितंबर को होगा।
ट्रम्प इफेक्टः अमेरिका में 7 माह में 50 हजार जॉब घट गए
वॉशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के 7 माह के कार्यकाल में अमेरिका में 50 हजार नौकरियां कम हुई हैं। नई भर्तियों में भी गिरावट आई है। ताजा रोजगार रिपोर्ट बताती है कि अगस्त में सिर्फ 22 हजार जॉब मिले। बेरोजगारी दर बढ़कर 4.3% हो गई
मैक्रों से मोदी की बातः शनिवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने प्रधानमंत्री मोदी से फोन पर बात की। दोनों ने भारत-फ्रांस के संबंधों का सकारात्मक मूल्याकंन किया। मैक्रों ने यूक्रेन संघर्ष को जल्द समाप्त करने के प्रयासों पर अपने विचार भी साझा किए।
