मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव रविवार को इंदौर के नैनोद गांव में इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर प्रोजेक्ट के पहले चरण का भूमि पूजन करेंगे। इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य इस क्षेत्र के औद्योगिक परिदृश्य को बदलना है।
प्रेस नोट में बताया गया कि 75 मीटर चौड़ी और 20 किलोमीटर लंबी सड़क के दोनों ओर 300 मीटर के दायरे में नियोजित विकास कार्य किए जाएंगे। यह प्रोजेक्ट 1,300 हेक्टेयर जमीन पर फैला हुआ है और इसकी अनुमानित लागत 2,360 करोड़ रुपए है।
इस प्रोजेक्ट से कनेक्टिविटी मजबूत होने, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा मिलने और औद्योगिक विकास के लिए एक अनुकूल माहौल तैयार होने की उम्मीद है। इसके साथ ही, स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे, जिससे इस क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास को एक नई गति मिलेगी।
प्रेस नोट के अनुसार, पहले चरण की अनुमानित लागत 326.51 करोड़ रुपए है। यह चरण इंफ्रास्ट्रक्चर विकास कार्यों की शुरुआत का प्रतीक होगा। वहीं, आवंटन को 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया है। इस कदम से किसानों का भरोसा बढ़ा है और उन्हें प्रोजेक्ट में स्वेच्छा से भाग लेने के लिए प्रोत्साहन मिला है।
आवंटन को बढ़ाकर 60 प्रतिशत किए जाने से किसानों को भविष्य में अधिक आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है। वे इस जमीन का उपयोग आवासीय, वाणिज्यिक या अन्य आर्थिक गतिविधियों के लिए कर सकते हैं, जिससे उनके और उनके परिवारों के लिए आय के स्थायी स्रोत बनेंगे।
इस प्रोजेक्ट के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक किसानों की सहमति से जमीन अधिग्रहण करना था, क्योंकि इंदौर शहर के करीब होने के कारण इस क्षेत्र में जमीन की मांग बहुत ज्यादा है। किसानों के हितों को प्राथमिकता देकर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विकास के लक्ष्यों और सामुदायिक कल्याण के बीच एक संतुलन बनाया है। उनके इस फैसले से किसानों की भागीदारी में बढ़ोतरी हुई है, जिससे कॉरिडोर के काम में तेजी और सुगमता आई है।
