Sanchar Saathi app: भारत सरकार ने डिजिटल सुरक्षा को एक नया ढांचा देने के लिए बहुत बड़ा फैसला किया है. दूरसंचार विभाग यानी DoT ने आदेश जारी किया है कि अब भारत में बिकने वाला हर नया स्मार्टफोन संचार साथी ऐप के साथ ही आएगा. खास बात यह है कि यह ऐप फोन में पहले से इंस्टॉल होगा और इसे हटाया नहीं जा सकेगा. मौजूदा फोन में भी यह ऐप अनिवार्य अपडेट के जरिए डाला जाएगा. एप्पल (Apple), सैमसंग (Samsung), शाओमी (Xiaomi), ओप्पो (Oppo), वीवो (Vivo) सभी कंपनियों के फोन पर यह नियम लागू होगा.
यह फैसला उस समय आया है जब सरकार ने हाल ही में वॉट्सऐप, सिग्नल और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म को भी SIM लिंकिंग अनिवार्य करने का आदेश दिया है. यानी जिस SIM से आपका अकाउंट बना है, वही सक्रिय होना चाहिए. SIM बदलते ही ऐप तक पहुंच खत्म हो सकती है और वॉट्सऐप वेब जैसे फीचर हर छह घंटे में ऑटो लॉगआउट होंगे.
स्मार्टफोन कंपनियों पर सीधे फोकस
अब सरकार का फोकस सीधे स्मार्टफोन कंपनियों पर है. DoT ने कहा है कि सभी कंपनियां अगले 90 दिनों के भीतर नए फोन में संचार साथी को प्रीइंस्टॉल करें और यह ऐप सेटअप के दौरान ही दिखे. पुराने डिवाइस जो पहले ही बनकर बाजार में पहुंचे हैं, उनमें भी इसे अनिवार्य अपडेट के जरिए भेजना होगा भारत का सेकेंड हैंड स्मार्टफोन बाजार बहुत बड़ा है और यहीं धोखाधड़ी की सबसे ज्यादा घटनाएं सामने आती हैं. चोरी या ब्लैकलिस्टेड फोन अक्सर सेकेंड हैंड मार्केट में आ जाते हैं. संचार साथी इसमें मदद करता है. इस ऐप के जरिये ग्राहक फोन खरीदने से पहले IMEI चेक कर सकता है कि यह ब्लॉक तो नहीं है. सरकार के मुताबिक संचार साथी पहले से उपलब्ध था और इसके 50 लाख से ज्यादा डाउनलोड हो चुके हैं. सितंबर तक 37.28 लाख चोरी या खोए फोन इस प्लेटफॉर्म से ब्लॉक किए गए और 22.76 लाख फोन ट्रेस भी किए गए. ऐप की सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह IMEI का इस्तेमाल करके चोरी या गुम फोन को ब्लॉक और खोजने में मदद करता है. साथ ही यह नकली फोन मार्केट पर भी सीधे वार करता है. ऐप सिर्फ फोन ट्रैकिंग नहीं करता बल्कि संदिग्ध कॉल, फर्जी मैसेज और OTT मैसेजिंग प्लेटफॉर्म जैसे वॉट्सऐप पर आए फ्रॉड को भी रिपोर्ट करने की सुविधा देता है.
सरकार का कहना है कि नए नियमों से यूजर सुरक्षा मजबूत होगी, साइबर फ्रॉड में कमी आएगी और मोबाइल की असली पहचान को ट्रैक करना आसान होगा. तीन महीने में यह नियम पूरी तरह लागू कर दिए जाएंगे और चार महीने में कंपनियों को अनुपालन रिपोर्ट भी देनी होगी.
