छतरपुर। जिले के सीएम राइज शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चंद्रनगर में महिला शिक्षिका द्वारा प्रभारी प्राचार्य के.के. अग्निहोत्री पर लगाए गए अभद्रता और मानसिक प्रताड़ना के आरोपों ने शिक्षा विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। मामला अब केवल विद्यालय तक सीमित न रहकर महिला सुरक्षा, विभागीय निष्पक्षता और अधिकारों की रक्षा से जुड़ा मुद्दा बन गया है।
*//अभद्र व्यवहार और मानसिक उत्पीड़न का आरोप//*
विद्यालय में पदस्थ शिक्षिका रेशमा बानो ने आरोप लगाया कि प्रभारी प्राचार्य उनके साथ अभद्र भाषा का उपयोग करते हैं और बार-बार अपमानित करते हैं। उन्होंने बताया कि विरोध करने पर उन्हें ही दोषी साबित करने की कोशिश की जा रही है। रेशमा बानो का कहना है कि मैंने गलत का विरोध किया, लेकिन मेरी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। आरोपी प्राचार्य महिला शिक्षिकाओं के साथ अनुचित व्यवहार करते हैं और विभाग उन्हें बचा रहा है।
*//प्रभारी पद पर नियुक्ति भी विवादित//*
सूत्रों के अनुसार के.के. अग्निहोत्री को प्रभारी प्राचार्य बनाए जाने में भी नियमों की अनदेखी हुई है। दावा है कि विद्यालय में ऐसे वरिष्ठ शिक्षकों का मौजूद होना, जो इस पद के पात्र थे, इसके बावजूद नियुक्ति दबाव, सिफारिश और विभागीय सहमति से की गई। स्थानीय शिक्षकों ने कहा यह नियुक्ति योग्यता से नहीं, दबाव और संबंधों के आधार पर की गई थी।
जांच प्रक्रिया पर पक्षपात के आरोप
शिक्षिका ने जांच टीम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जांच अधिकारी आरोपी के रिश्तेदार हैं। इसके चलते निष्पक्ष जांच की संभावना संदिग्ध हो गई है। शिक्षिका का आरोप है कि जब जांच अधिकारी ही आरोपी के पक्ष का है, तो न्याय कैसे मिलेगा? शिक्षिका ने यह भी कहा कि जब जांच टीम विद्यालय पहुंची, तो उन्हें जानबूझकर सूचना नहीं दी गई, ताकि वे अपनी बात सामने न रख सकें। थाना स्तर पर मामला दर्ज करते हुए छानबीन की बात कही गई है, लेकिन अब तक बयान दर्ज न होना और प्रगति का न दिखना सवालों को और गहराता है। थाना प्रभारी ने बयान दिया है है कि दो दिन में रिपोर्ट तैयार कर ली जाएगी। हालांकि, अब तक कोई ठोस कदम नजर नहीं आया। वहीं रेशमा बानो ने स्पष्ट कहा है कि यदि विभागीय और जिला स्तर पर न्याय नहीं मिला तो वे महिला आयोग और उच्च न्यायालय का रुख करेंगी। न्होंने कहा कि सच सामने आएगा, चाहे जितना प्रयास कर मामले को दबाया जाए।
*//विद्यालय और क्षेत्र के शिक्षकों में नाराज़गी//*
यह घटना शिक्षकों में असंतोष और आक्रोश का कारण बनी है। शिक्षकों का कहना है कि यदि एक महिला शिक्षक को न्याय नहीं मिल पा रहा, तो यह पूरे शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता को चोट है। शिक्षकों ने कहा कि यह मामला अब सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि स्कूलों में सुरक्षित कार्य वातावरण के अधिकार का सवाल है।
*इनका कहना*
के.के. अग्निहोत्री को प्रभारी पद से हटाकर केवल शिक्षक के रूप में रखा गया है, और दोबारा जांच कराई जा रही है।
//अरुण शंकर पांडे, जिला शिक्षा अधिकारी/)
