जिले में चर्चित जुआ कांड अब सिर्फ पुलिस की कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। इस पूरे मामले ने अब प्रशासनिक हलचल मचा दी है।
कलेक्टर पार्थ जायसवाल और पुलिस अधीक्षक अगम जैन ने संयुक्त सख्ती दिखाते हुए जुआ खेलते पकड़े गए सरकारी कर्मचारियों और पेशेवर जुआरियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।
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⚡कलेक्टर की सख्ती — दो शासकीय कर्मियों को कारण बताओ नोटिस
22 अक्टूबर की रात थाना सिविल लाइन पुलिस ने छापेमारी कर 24 लोगों को जुआ खेलते रंगे हाथ पकड़ा था। इनमें जल संसाधन विभाग के उपयंत्री (प्रतिनियुक्ति पीएचई) ओ.पी. दुबे और शिक्षक कैलाश मिश्रा भी शामिल थे।
इस पर कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने दोनों कर्मचारियों को म.प्र. सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के तहत कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा है।
कलेक्टर ने साफ कहा है —
> “शासन की साख से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।”
अगर जवाब असंतोषजनक पाया गया तो म.प्र. सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही होगी।
थाना प्रभारी की कार्रवाई — कुख्यात जुआरी का पिस्टल लाइसेंस रद्द कराने की सिफारिश
वहीं पुलिस अधीक्षक अगम जैन के निर्देश पर कोतवाली थाना प्रभारी अरविंद दांगी ने कुख्यात जुआरी अजय अग्रवाल उर्फ अम्मू चौधरी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू की है।
उन्होंने अग्रवाल के पिस्टल लाइसेंस को निरस्त कराने हेतु प्रतिवेदन भेजा है।
बताया जाता है कि अजय अग्रवाल पहले भी कई बार जुआ प्रकरणों में पकड़ा जा चुका है, बावजूद इसके उसे लाइसेंस मिला —
अब सवाल उठता है कि लाइसेंस प्रक्रिया में किसने दी ढिलाई?
क्या इस पर भी होगी जांच?
प्रशासन ने दिया सख्त संदेश — “कानून से ऊपर कोई नहीं”
कलेक्टर और एसपी की इस संयुक्त कार्रवाई से साफ संदेश गया है कि चाहे सरकारी अफसर हो या आम नागरिक, अपराध और गैरकानूनी गतिविधियों पर अब जीरो टॉलरेंस रहेगा।
यह कदम जिले में कानून व्यवस्था को मजबूत करने और शासन की साख को बहाल करने की दिशा में अहम माना जा रहा
छतरपुर प्रशासन की इस निर्णायक कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि अब जुए और भ्रष्टाचार की बाजी नहीं चलेगी… कानून की बाजी चलेगी! 🎯
