तौलियों से ढंकी कार को सुनसान जगह सबसे पहले देखने वाले चश्मदीदों ने पूरी कहानी बयां की है. पंचकूला सेक्टर 27 के कुछ बाशिंदों ने रात को 10 बजे वहां खाली प्लॉट के पास कार खड़ी देखी, जिसके शीशों को रंगबिरंगी तौलियों से चारों ओर से ढंका गया था. कार के अंदर तीन छोटे छोटे बच्चों को जिसने भी वहां देखा, उसका दिल दहल उठा. प्रवीण मित्तल की पत्नी, उनके मां-बाप कार के अंदर मरे पड़े थे. चश्मदीदों के बीच आधे घंटे के भीतर प्रवीण मित्तल ने कुछ खुलासे किए और फिर अस्पताल में दम तोड़ दिया था.
प्रत्यक्षदर्शियों में शामिल पुनीत ने बताया, हमने उत्तराखंड नंबर की गाड़ी यहां देखी. चौतरफा तौलियों से ढंकी कार देखकर युवकों को अजीब लगी और वो गाड़ी के पास गए. कार की अगली सीट और पिछली सीट पर सब बेसुध हालत में दिख रहे थे. कार की आगे की सीट पर बैठे शख्स से युवकों ने पूछा कि आप यहां क्या कर रहे हो तो उसने बताया कि हम सब बाबा बागेश्वर धीरेंद्र शास्त्री की हनुमंत कथा में शामिल होने आए थे. होटल में कमरा नहीं मिला तो यहां कार में ही सो गए. पहले तो उसने गाड़ी चला रहे प्रवीण मित्तल से कार आगे कहीं मार्केट में ले जाने को कहा. लेकिन कार के अंदर से बदबू आने पर युवकों को संदेह हुआ.
