नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में स्थित ऐतिहासिक दिल्ली रेस क्लब की करीब 53 एकड़ भूमि पर केंद्र सरकार ने कब्जा लेने के बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी है। इस कार्रवाई के साथ ही करीब एक सदी से चली आ रही घुड़दौड़ (हॉर्स रेसिंग) की परंपरा पर भी विराम लग गया है। अदालत से अंतरिम राहत नहीं मिलने के बाद बुलडोजर ने क्लब की कई पुरानी और ऐतिहासिक इमारतों को जमींदोज कर दिया।
मंगलवार को पटियाला हाउस कोर्ट ने दिल्ली रेस क्लब की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें संपदा अधिकारी द्वारा 11 अगस्त को जारी बेदखली आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने लुटियंस दिल्ली के लोक कल्याण मार्ग स्थित परिसर का कब्जा अपने हाथ में ले लिया।
ध्वस्तीकरण के दौरान अस्तबल, बुकमेकर्स रिंग, विनिंग पोस्ट, फोटो-फिनिश कैमरा और सैडलिंग एनक्लोजर जैसी ऐतिहासिक संरचनाएं भी गिरा दी गईं, जो कभी दिल्ली में घुड़दौड़ का प्रमुख केंद्र थीं। क्लब अधिकारियों के अनुसार, परिसर में मौजूद 250 से अधिक घोड़ों में से लगभग 200 को उनके मालिक वापस ले जा चुके हैं, जबकि शेष घोड़ों को भी जल्द अन्य रेसिंग केंद्रों में भेजा जाएगा।
कानूनी विवाद मार्च में शुरू हुआ था, जब भूमि एवं विकास कार्यालय ने क्लब को 15 दिनों के भीतर सरकारी जमीन खाली करने का नोटिस जारी किया था। नोटिस में कहा गया था कि जमीन की आवश्यकता सार्वजनिक कार्यों के लिए है। क्लब ने इस आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन बाद में अदालत ने बेदखली प्रक्रिया जारी रखने का रास्ता साफ कर दिया।
गौरतलब है कि 1940 के दशक में पुनर्निर्मित किए गए क्लब के अस्तबल विशेष रूप से दिल्ली की गर्मी को ध्यान में रखकर बनाए गए थे, ताकि घोड़ों को बेहतर वातावरण मिल सके। क्लब के बंद होने के साथ ही देश की घुड़दौड़ संस्कृति का एक महत्वपूर्ण अध्याय भी इतिहास बन गया है।
