पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की गिरती सेहत पर सारा देश चिन्ता जता रहा है। विपक्ष बहरी सरकार का आरोप लगा रहा है। ऐसे में क्या दिल्ली हाई कोर्ट वकील राकेश सैनी की याचिका पर सोनम वांगचुक को जबरन लिक्विड डाइट देने का आदेश दे सकता है।
हाई कोर्ट ने मामले को ‘अति महत्वपूर्ण’ माना
दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की खंडपीठ ने वकील राकेश कुमार सैनी द्वारा दायर इस जनहित याचिका (PIL) को तत्काल सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे ‘अति महत्वपूर्ण’ माना है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार (Union of India) और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर इस पूरे मामले पर उनका पक्ष (Stand) मांगा है। हालाँकि याचिका पर सुनवाई बुधवार (15 जुलाई) को ही होनी थी, लेकिन केंद्र सरकार के वकील की अनुपस्थिति के कारण कोर्ट ने मामले को कल यानी गुरुवार (16 जुलाई 2026) के लिए टाल दिया है। अदालत ने रजिस्ट्री विभाग को निर्देश दिया है कि वह आज ही इस आदेश की कॉपी संबंधित सरकारी अधिकारियों तक पहुंचाए ताकि वे कल पूरी तैयारी और निर्देशों के साथ कोर्ट में हाजिर हो सकें।
- कोर्ट में वकीलों के काम से दूर रहने (हड़ताल) के आह्वान के बावजूद, जजों ने याचिकाकर्ता से कहा, “हम आपकी याचिका पर विचार कर रहे हैं। हम इसे कल गुरुवार 16 जुलाई के लिए सूचीबद्ध कर रहे हैं और केंद्र सरकार को इस पर निर्देश प्राप्त करने के लिए कहेंगे।”
याचिका में कही गई मुख्य बातें
- 2 दिन में जान जाने का खतरा: एक्टिविस्ट और वकील राकेश कुमार सैनी द्वारा दायर इस याचिका में दावा किया गया है कि वांगचुक की स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी है। अगर यह भूख हड़ताल जारी रही, तो अगले दो दिनों के भीतर उनकी जान जा सकती है।
- 8.5 किलो वजन कम हुआ: आंदोलन के आयोजकों के मुताबिक, 28 जून से शुरू हुए इस अनशन के कारण सोनम वांगचुक का वजन अब तक लगभग 8.5 किलोग्राम घट चुका है।
- जबरन खाना खिलाने की मांग: याचिका में तर्क दिया गया है कि वांगचुक के जीवन को बचाना इस समय सबसे महत्वपूर्ण है। इसलिए उनकी इच्छा के विरुद्ध जाकर भी उन्हें सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया जाना चाहिए और नसों या नली के जरिए जरूरी पोषक तत्व, विटामिन और मिनरल्स दिए जाने चाहिए। याचिका में कहा गया, “अगर उन्हें कुछ होता है, तो यह देश और दुनिया के लिए बेहद शर्म की बात होगी।”
- सरकार पर गंभीर आरोप: जनहित याचिका में सरकार पर अपनी जिम्मेदारी से भागने का आरोप लगाया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि सरकार वांगचुक के साथ ऐसा व्यवहार कर रही है जैसे वह कोई “कट्टर अपराधी, आतंकवादी या देशद्रोही” हों और उनके स्वास्थ्य की प्रशासन को कोई चिंता नहीं है।
कानूनी और संवैधानिक तर्क
याचिका में कहा गया है कि हालांकि शांतिपूर्ण विरोध और भूख हड़ताल करना नागरिकों का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन राज्य (State) का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह हर नागरिक के जीवन और स्वास्थ्य की रक्षा करे। अधिकारियों का इस स्थिति में मूकदर्शक बने रहना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारियों की विफलता माना जाएगा। याचिका में भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत आत्महत्या के उकसावे से जुड़े प्रावधानों का भी हवाला दिया गया है।
क्यों भूख हड़ताल पर हैं सोनम वांगचुक?
सोनम वांगचुक ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) द्वारा आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होकर 28 जून से जंतर-मंतर पर डटे हुए हैं। इस आंदोलन के जरिए नीट (NEET) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई कथित अनियमितताओं और धांधली को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की जा रही है।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अपील, लिखा पत्र
मैं आज आपसे एक राजनेता या सांसद के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति के रूप में बात कर रहा हूँ जो भारत की युवा पीढ़ी के साथ हो रहे अन्याय से बेहद आहत है। यह लड़ाई मेरे लिए व्यक्तिगत है। मैं जानता हूँ कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों के लिए एक पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली ही आगे बढ़ने की एकमात्र सीढ़ी है। जब पेपर लीक और परीक्षाओं के रद्द होने से यह सीढ़ी टूटती है, तो अमीर और रसूखदार लोगों के बच्चों को फर्क नहीं पड़ता क्योंकि उनके पास दूसरी सीढ़ियां होती हैं; नुकसान सिर्फ आपके सपनों और आपके परिवारों के बलिदानों का होता है। जंतर-मंतर पर जुटे और देश भर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं से मैं कहना चाहता हूँ कि आपका गुस्सा अनुशासनहीनता नहीं, बल्कि उस पीढ़ी का दर्द है जिसने सब कुछ सही किया फिर भी उसे धोखा मिला। आप खुद को अकेला न समझें, पूरा देश आपकी आवाज सुन रहा है।
वांगचुक से अनशन खत्म करने की अपील की
नीट परीक्षा पर इतना विवाद क्यों है
- पेपर लीक के आरोप: देश के कई राज्यों (विशेषकर बिहार और गुजरात) से परीक्षा से पहले ही पेपर लीक होने और सॉल्वर गैंग की संलिप्तता के गंभीर आरोप लगे, जिसकी जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और पुलिस कर रही है।
- असामान्य रूप से 67 टॉपर्स: परीक्षा के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि रिकॉर्ड 67 छात्रों ने 720 में से पूरे 720 अंक हासिल कर लिए और AIR-1 (ऑल इंडिया रैंक 1) पाई। इनमें से कई छात्र एक ही परीक्षा केंद्र से थे, जिससे धांधली का शक गहरा गया।
- ग्रेस मार्क्स (कृपांक) का विवाद: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने समय के नुकसान का हवाला देकर 1,563 छात्रों को ग्रेस मार्क्स दिए। इसके कारण कई छात्रों को 718 और 719 अंक मिले, जो कि परीक्षा की मार्किंग स्कीम के तहत सामान्य रूप से पाना असंभव है। भारी विरोध के बाद सरकार को इन ग्रेस मार्क्स को रद्द कर छात्रों को दोबारा परीक्षा का विकल्प देना पड़ा।
- NTA और परीक्षा प्रणाली पर अविश्वास: इस पूरे घटनाक्रम ने भारत में परीक्षाओं का आयोजन कराने वाली संस्था ‘नेशनल टेस्टिंग एजेंसी’ (NTA) की विश्वसनीयता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। छात्र और शिक्षाविद अब एनटीए को भंग करने या इसमें आमूल-चूल सुधार करने की मांग कर रहे हैं।
