बिलासपुर के सरकंडा स्थित जुवेनाइल होम में जेल शिफ्टिंग से ठीक पहले चार बाल आरोपियों ने सुरक्षा गार्ड नरेंद्र कुमार खांडे की गला घोंटकर हत्या कर दी. सभी नाबालिग आरोपी हत्या, दुष्कर्म और चोरी जैसे गंभीर मामलों में बंद थे. वारदात के बाद सीसीटीवी का डीवीआर और बाइक लेकर फरार हो गए.
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित सरकंडा बाल संप्रेषण गृह (Juvenile Observation Home) में सुरक्षा गार्ड नरेंद्र कुमार खांडे की नृशंस हत्या और उसके बाद चार बाल कैदियों के भागने की वारदात ने पूरी प्रशासनिक व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है. पुलिस की शुरुआती जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं. यह कोई अचानक हुआ विवाद नहीं था, बल्कि जेल शिफ्टिंग के डर से इन शातिर बाल अपचारियों द्वारा रची गई एक बेहद खौफनाक और सुनियोजित साजिश का हिस्सा था.
हत्या, दुष्कर्म, छेड़खानी और चोरी जैसे गंभीर अपराधों में बंद इन चारों नाबालिगों को भली-भांति पता था कि जल्द ही उन्हें यहां से दूसरी जेल में शिफ्ट किया जाने वाला है, जिससे बचने के लिए उन्होंने चौकीदार को ही रास्ते से हटाने का प्लान तैयार कर लिया. साजिश के मुताबिक, रविवार की रात को जब पूरा परिसर सो चुका था, तब चारों बाल अपचारियों ने अपनी खौफनाक प्लानिंग को अमलीजामा पहनाना शुरू किया.
रात करीब 11 बजे जैसे ही प्रथम तल पर ड्यूटी कर रहे 41 साल के सुरक्षा गार्ड नरेंद्र कुमार खांडे उनके वार्ड के पास पहुंचे, तभी चारों ने मिलकर उन पर अचानक हमला बोल दिया. नरेंद्र जब तक कुछ समझ पाते, आरोपियों ने उन्हें जमीन पर पटक दिया. इसके बाद उन्होंने नरेंद्र के दोनों हाथ और पैर पीछे की तरफ रस्सी से बेरहमी से बांध दिए, ताकि वे खुद को बचाने की कोशिश न कर सकें.
उनकी चीखें बाहर न जा सके, इसलिए मुंह में गमछा ठूंस दिया गया और फिर चारों ने मिलकर क्रूरता से उनका गला घोंट दिया, जिससे दम घुटने से नरेंद्र की मौके पर ही मौत हो गई. चौकीदार को मौत के घाट उतारने के बाद इन शातिर अपराधियों ने अपनी साजिश के दूसरे हिस्से पर काम करना शुरू किया, जो कि सबूत मिटाने से जुड़ा था. जिला महिला बाल विकास अधिकारी सुरेश सिंह के अनुसार, ये बाल अपराधी दूसरी मंजिल पर रहते थे, लेकिन हत्या के बाद वे मृत चौकीदार से चाबियां छीनकर नीचे उतरे.
उन्होंने सबसे पहले बंद गेट खोला और फिर सीधे अधीक्षक के कमरे में दाखिल हो गए. इस कमरे में पूरे परिसर की चाबियां और सीसीटीवी का पूरा सिस्टम लगा हुआ था. आरोपियों ने अपनी पहचान छुपाने और पुलिस को गुमराह करने के लिए वहां रखे सीसीटीवी कैमरे का डीवीआर, मॉनिटर और परिसर की चाबियों के दो-तीन गुच्छे उखाड़कर अपने पास रख लिए, ताकि कोई वीडियो फुटेज बाकी न रहे. इसके बाद इन चारों बाल अपचारियों ने भागने के लिए छत के रास्ते का चुनाव किया.
वे भागते हुए तीसरी मंजिल पर गए और वहां की सुरक्षा जाली को बेहद चालाकी से हटाकर छत पर पहुंच गए. वहां से वे परिसर में लगे एक बड़े पेड़ की टहनियों के सहारे नीचे उतरे और मुख्य गेट की तरफ बढ़ गए. गेट के बाहर सुरक्षा के लिए तैनात दूसरे गार्ड की मोटरसाइकिल खड़ी थी. आरोपियों ने अधीक्षक के कमरे से जो चाबियां चुराई थीं, उनमें से एक चाबी उस बाइक में फिट हो गई. इसके बाद चारों आरोपी उसी मोटरसाइकिल पर सवार होकर पलक झपकते ही हवा हो गए.
सुबह जब घटना का पता चला, तो कलेक्टर संजय अग्रवाल और एसएसपी रजनेश सिंह ने मौके पर पहुंचकर इस पूरी साजिश की कड़ियों को खंगाला. इस जघन्य हत्याकांड के बाद तखतपुर के ग्राम अरईबंद निवासी मृतक नरेंद्र के परिजनों में भारी आक्रोश है. परिजनों और विभिन्न संगठनों ने मुआवजे, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच समेत अपनी 12 सूत्रीय मांगों को लेकर सोमवार को दिनभर बाल संप्रेषण गृह के बाहर प्रदर्शन किया और शव को उठाने नहीं दिया.
देर शाम प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा त्वरित कार्रवाई के ठोस आश्वासन और समझाइश के बाद परिजन शांत हुए, जिसके बाद शव को सिम्स मरचुरी भेजा जा सका. फिलहाल बिलासपुर पुलिस ने फरार हुए चारों शातिर नाबालिग आरोपियों की तलाश में पूरे जिले में कड़ा पहरा लगा दिया है और उनकी धरपकड़ के लिए कई टीमें लगातार दबिश दे रही हैं.
