पूर्व सांसद और राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख रहे डॉ. रामविलास वेदांती (वेदांती जी महाराज) को आज अंतिम विदाई दी जाएगी। देर रात पार्थिव शरीर उनके आवास हिंदू धाम पहुंचा। पार्थिव शरीर को हनुमानगढ़ी और राम जन्मभूमि का दर्शन कराकर अंतिम विदाई दी जाएगी। सीएम योगी आदित्यनाथ सुबह करीब 11 बजे उनको अंतिम विदाई देने अयोध्या पहुंचेंगे और 12 बजे डॉ वेदांती का सरयू तट पर अंतिम संस्कार किया जाएगा।
राम कथा कहते बिगड़ी थी तबियत
बता दें कि डॉ रामविलास वेदांती 75 साल के थे। वह 10 दिसंबर को मध्यप्रदेश से रीवा पहुंचे थे। जहां उनकी रामकथा चल रही थी। इसी दौरान अचानक तबीयत बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनके निधन से संत समाज और राजनीति जगत में शोक की लहर व्याप्त है। रामविलास वेदांती ने राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख संत के रूप में सालों तक संघर्ष किया। साथ ही अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए दशकों तक तप, त्याग और संघर्ष का मार्ग
राम मंदिर आंदोलन से शुरुआती दौर से जुड़े रहेडॉ राम विलास वेदांती का जन्म 7 अक्टूबर 1958 को हुआ। राम विलास वेदांती राम मंदिर आंदोलन से शुरुआती दौर से जुड़े रहे और 12 वीं लोकसभा के संसद सदस्य रहे। पहली बार प्रतापगढ़ जिले में रामविलास वेदांती ने कमल खिलाया था। वर्ष 1996 में मछली शहर और 1998 में (Dr. Ram Vilas Vedanti has passed away) जिले का सांसद चुने जाने के बाद मंदिर आंदोलन को धार देने के कारण उन्हें राम मंदिर जन्मभूमि न्यास के कार्यकारी अध्यक्ष का दायित्व सौंपा गया था।
रामभक्तों को एकजुट कियाराजा-रजवाड़ों के इर्द-गिर्द घूमने वाली राजनीति में पहली बार प्रतापगढ़ बेल्हा के वोटरों ने भगवान राम के नाम पर संत को अपना जनप्रतिनिधि चुनकर देश के सबसे बड़े सदन में भेजा था। उन्होंने न केवल जनजागरण के माध्यम से रामभक्तों को एकजुट किया, बल्कि न्यायालय में सत्य (Dr. Ram Vilas Vedanti has passed away) और आस्था के पक्ष में निर्भीक होकर अपनी गवाही भी दी। उनका जीवन संतत्व, राष्ट्रभक्ति और धर्म के प्रति अटूट समर्पण का उदाहरण रहा।
