एक समय था जब शाम होते ही घरों में रेडियो की आवाज गूंजने लगती थी। लोग अपने काम जल्दी निपटाकर रेडियो के सामने बैठ जाते थे, ताकि पसंदीदा गीत और कार्यक्रम छूट न जाएं। उस दौर में रेडियो सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि परिवार को जोड़ने वाला माध्यम भी था।
समय बदला, टीवी आया, फिर मोबाइल और इंटरनेट का दौर शुरू हुआ, लेकिन रेडियो की अपनी पहचान कभी खत्म नहीं हुई। आज भी लोग सफर के दौरान, काम करते समय या खाली वक्त में FM रेडियो सुनना पसंद करते हैं। विश्व रेडियो दिवस हमें इसी सफर की कहानी याद दिलाता है।
