कई बार सुबह उठते ही मन भगवान को याद करना चाहता है, लेकिन शरीर बिस्तर छोड़ने को तैयार नहीं होता। ऐसे में मन में सवाल उठता है क्या बिस्तर पर बैठे-बैठे भगवान का नाम जप सकते हैं? क्या यह सही है या इससे भक्ति में कमी आती है? यही सवाल हाल ही में एक भक्त ने दरबार में पूछा।
इसी सवाल का सरल और स्पष्ट जवाब दिया प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज ने। उनके उत्तर ने लाखों लोगों की उलझन दूर कर दी। उन्होंने बताया कि नाम जप और गुरु मंत्र जप में फर्क समझना बहुत जरूरी है। दोनों का महत्व अलग है और नियम भी अलग
